KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गैर पर हो जाए बैर

गैर पर हो जाए बैर।
अपने ना हो गैर ।
जान ले ओ मेरे यारा हो जाए ना देर ।
(अपने तो हैं अपने अपने के सपने सब अपने)
घर का तू है हिस्सा, घर से जुड़ी है हर किस्सा।
फिर क्यों नाराज है अपनों से थूँक दे तेरी गुस्सा ।
वरना जान ले ,ना होगी तेरी खैर।।
बह चला है तू किस ओर ?
तोड़ चला है तू ममता की डोर ।
आजा फिर उसी गली में
बिठा ना दिल में चोर ।।
कहना मान ले रोक ले अपने पैर ।।
धोखा है उस पार, मौका है इस पार।
लौट आ मेरे यार, सुन ले मेरी पुकार।
बिछा दूंगा तेरे लिए खुशियों का ढेर ।।
(सुनी हो जाए ना घर तेरे बगैर)

लिरिक्स : मनीभाई नवरत्न

Leave A Reply

Your email address will not be published.