KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

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तुझे देखा तो ना जाने

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तुझे देखा तो ना जाने

तुझे देखा तो ना जाने ,मुझे क्या होने लगा है ?
बरसों से जिसकी चाहत थी,हमें वो होने लगा है ?

तनहाई के सागर में
डूबने को थी कश्ती हमारी ।
तेरा सहारा मिला हमें
लौटा दी तूने मस्ती सारी ।।
तेरे आस से लौटा साहस
फिर पतवार खोने लगा है।
दुनिया के लिए मर चुका था
अबके जीवन है तुम्हारी।
कल के जीवन से बेहतर है
अबकी जीवन है प्यारी ।।
यम की दर से लौटाया तूने,
अंसुवन मेरे ,चरण तेरे धोने लगा है ।।
तूने देखा तो…..

मनीभाई नवरत्न

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