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देवी के अनेक रूप , प्रिया शर्मा

हिन्दू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ

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चंडी है, दुर्गा है, तू ही तो महाकाली है,

वन-उपवन में तू ही तो फूलों को महकाती है।

महिषासुर मर्दिनी है, तू ही शिव की शक्ति है,

हर स्त्री में अंश तेरा ही, तू निष्ठा और भक्ति है।

लक्ष्मी है, गौरी है, तू घुंघरू की झनकार है,

ज्ञान की देवी तू ही, तू नारी का श्रृंगार है।

सीता है, भगवद्गीता है, तू काली का अवतार है,

चण्ड -मुण्ड संहारिणी है, तू तेजधार तलवार है।

गंगा है, यमुना है, तू ही सृष्टि का आधार है,

राधा तेरे नाम से इस जग में प्रेम भाव विस्तार है।

अन्नपूर्णा है, अनसुइया है, तू अहिल्या सी नारी है,

सबरी की भक्ति तू, तू द्रौपदी की विस्तृत साड़ी है।

गीत तुझी से, साज तुझी से, तुझमें ज्ञान अपार है,

भ्रमरों दी गुंजन तुझसे, नदियों की कलकल तुझसे, तुझमें सकल संसार है।

– प्रिया शर्मा

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