KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

धरती माता

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  *चौपाई*

धरती को हम माँ सम माने।
माँ की महिमा सभी बखाने।।1

धरा धरे सब को अपने में।
कुपित होई नहीं सपने में।।2

अनुपम धीरज रखती भाई।
भूमि तभी धरती कहलाई।।3

जल थल अन्न खनिज सब धारे।
पर्वत पौधे मकां हमारे।।4

सागर नदिया ताल तलाई।
रहे धरा हित जगत भलाई।।5

पर्यावरण प्रदूषित मत कर।
मानव बन पृथ्वी का हितकर।।6

पृथ्वी पर तुम पेड़ लगाओ।
चूनरधानी फसल उगाओ।।7

धरापूत हैं कृषक हमारे।
उनके भी अधिकार विचारे।8

✍✍©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा, दौसा,राज.

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