KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

नित्य करूँ मैं वंदना

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, *दोहा छंद*
, * नित्य करूँ मैं वंदना*

नित्य करूँ मैं वंदना,
गुरुवर को कर जोर।
पाऊँ चरणों में जगह ,
होकर भाव विभोर।।

मात-पिता भगवान हैं,
करना वंदन रोज।
इन देवों को छोड़कर,
करते हो क्या खोज?

जिनके आशीर्वाद से ,
हुआ सफल हर काम।
करता हूँ नित वंदना,
मात-पिता के नाम।।

धरती माँ की वंदना,
यह ही जग में सार।
सबको समान जानकर,
करती हैं उपकार।।

प्रेम भाव से वंदना,
जन जन को है आज ।
रहे सफलतम कर्म सब,
बन जाए सब काज।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभवना,बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. 8120587822

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