KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

माना हम तेरे लायक नहीं

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माना हम तेरे लायक नहीं

माना हम तेरे लायक नहीं
मनचाहा फल दायक नहीं ।
तो भी हमसे मुख मोड़ो ना
तन्हा छोड़ो ना ।।
यूं तो रिश्ता अपना हर रिश्तों से बढ़कर है ।
फिर क्यों ये फासला हर फासलों से बढ़कर है।
तू रह कर भी रहता नहीं
और ना रह कर भी रहता है ।
मेरा दिल नाजुक शीशे का
गिरा के तोड़ो ना
तन्हा छोड़ो ना ।।
तुमको पाकर पा लिया
मैंने अपना हमसफ़र ।
कतरे कतरे को है पता
बस तुझे ही ना खबर ।
तू कह कर भी कहता नहीं ।
और ना कहकर भी कहता है।
यह जहां है खुदगर्जो का
जिनके पीछे दौड़ो ना
तन्हा छोड़ो ना।।
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