KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

शब्द संपदा

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~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
. ? *शब्द सम्पदा* ?
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*भावन~ मन को प्रिय लगने वाला*
रामकथा कहि शिव उमा, भावन मुनि आवास।
कागा गरुड़ उवाच जन, मानस तुलसीदास।।

सावन मन भावन हुआ, रिमझिम बरसे मेह।
चातक कोयल मोर सम, चाहत विरहा नेह।।

*भावना~ मनोभाव*
देश प्रेम सद् भावना, जन गण मन अभिराम।
झलक छलक गणतंत्र में, अमर तिरंगा थाम।।

जन गण मन की भावना, अपना देश महान।
रहे जगत गुरु मान पद, कनक विहग पहचान।।

*भवानी~ पार्वती*
समर भवानी सी लगी, कर असि बैठ तुरंग।
गुंजित जय जय भारती, झाँसी लक्ष्मी संग।।

. उमा भवानी पार्वती, गौरा सुता-हिमेश।
. भावन भारत देश वर, चाहत वरण महेश।।
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शर्मा बाबू बौहरा, दोहे सप्त प्रमाण।
भाव भवानी भावना, भावन भरमें प्राण।।
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✍©
बाबू लाल शर्मा,बौहरा
सिकंदरा,दौसा, राजस्थान
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