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सोरठा छंद विधान-बाबू लाल शर्मा,बौहरा(sortha chhand vidhan)

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सोरठा छंद विधान


सोरठा चौबीस मात्रिक छंद है। चार चरण होते हैं।
दोहे से उलट – विषम चरण ११ मात्रिक और सम चरण १३ मात्रिक होते हैं।
विषम चरण समतुकांत हो,चरणांत २१ गुरु लघु अनिवार्य है।
 सम चरणांत २१२ गुरु लघु गुरु हो।
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पटल करे सम्मान, नये सृजक आवें भले।
१११ १२ २२१, १२ १११ २२ १२
एक यही अरमान, सीखें हिन्दी हिन्द हित।
२१ १२ ११२१, २२ २२ २१ ११
लिखूँ सोरठा छंद, शारद माता ज्ञान दे।
१२ २१२ २१, २११ २२ २१ २
रहा अभी मतिमंद, शर्मा बाबू लाल तो।।
१२ १२ ११२१, २२ २२ २१ २
आओ मिलकर साथ,पुण्यपटल पर सीखलें।
कलम बढ़ाओ हाथ, लिखें छंद सोरठ सखे।।
दोहे से विपरीत, विषम चरण समतुक रखो।
लिखें छंद हे मीत,कठिन नहीं सोरठ सृजन।।
चौबिस मात्रिक छंद,ग्यारह तेरह गिन लिखें।
मीत विषम चरणांत, समतुकांत भावन भरे।।
. ✍ *दोहा-सोरठा-दोहा सम्बंध*✍
*दोहा-*
सीखें साथी अमित से, कृपा करें नंदलाल।
२२ २२ १११ २, १२ १२ २१२१
चाहत सोरठ सीखना, शर्मा बाबू लाल।।
२११ २११ २१२, २२ २२ २१
*सोरठा-*
कृपा करें नंदलाल, सीखें साथी *अमित* से।
१२ १२ २१२१, २२ २२ १११ २
शर्मा बाबू लाल, चाहत सोरठ सीखना।। 
२२ २२ २१, २११ २११ २१२
इस तरह सतत अभ्यास कीजिए, गुनगुनाइए, लयबाधा न रहे। सुन्दर छंद बनेगा, शुभकामनाएं???
✍©
बाबू लाल शर्मा,बौहरा
सिकंदरा,दौसा,राजस्थान
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