KAVITA BAHAR
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हम तो केवल उनके बयानों में रहे -नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

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हम तो केवल उनके बयानों में रहे

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हम जब तक रहे बंद मकानों में रहे।
वे कहते हैं हम उनके ज़बानों में रहे।1।

उनके लिए बस बाज़ार है ये दुनियाँ
गिनती हमारी उनके सामानों में रहे।2।

मुफ़लिसी हमारी तो गई नहीं मगर
हमारी अमीरी उनके तरानों में रहे।3।

जो बड़े जाने-पहचाने लगते हैं अब
कभी हम भी उनके बेगानों में रहे ।4।

उसने घास नहीं डाली ये और बात है
कभी हम भी उनके दीवानों में रहे।5।

पूछो मत हमारे हालात की हकीकत
हम तो केवल उनके बयानों में रहे।6।

— नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

9755852479

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