August 2021

खेल कराते मेल – खेल दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

खेल समाज को स्वस्थ बनाने के साथ साथ मित्रता से रहना भी सिखलाते हैं। खेल से बच्चों में सामाजिकता का विकास होता है।

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उपन्यास गांधी चौक ‘ जैसा मेंने समझा

समाज और यथार्थ

हिन्दी के नवांकुर लेखक डा. आनंद कश्यप का प्रथम उपन्यास ” गांधी चौक ” केवल एक कहानी नहीं है. बल्कि छत्तीसगढ़ के संघर्षरत युवाओं की यथास्थिति का यथार्थ चित्रण है. चूंकि लेखक स्वयं एक प्रतियोगी हैं, तो उपन्यास में उन्होंने भावों के साथ अपनी आत्मा भी पिरो दी है.

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महिला सांसदों पर मार्शल बल का प्रयोग –

देशभक्ति

पिछड़ा वर्ग के संबंध नये कानून के संदर्भ में आयोजित संसद के सत्र में महिला सांसदों के साथ बदसलूकी की गई है.

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beti

बिटिया की शादी कर दूँगा

हिंदी कविता

बिटिया की शादी कर दूँगा गीत (१६,१६) अब के सब कर्जे भर दूँगा,बिटिया की शादी कर दूँगा।। खेत बीज कर करी जुताई,अब तो होगी बहुत कमाई।शहर भेजना, सुत को पढ़ने।भावि जीवनी उसकी गढ़ने।गिरवी घर भी छुड़वा लूँगा,बिटिया की शादी कर दूँगा।। फसल बिकेगी,चारा होगा,दुख हमने तो सारा भोगा।अब वे संकट नहीं रहेंगे,सहा खूब,अब नहीं सहेंगे।दो

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mahapurush

पंजाब धरा का सिंह शूर

हिंदी कविता

पंजाब धरा का सिंह शूर विधा-पदपादाकुलक राधेश्यामी छंद पर आधारित गीत। पंजाब धरा का सिंह शूर, फाँसी पर हंसकर झूल गया।बस याद उसे निज वतन रहा,दुनियादारी सब भूल गया। माँ की गोदी का लाल अमर,था गौरव पितु के मस्तक का।उस आँगन देहरी द्वार गली,है नमन तीर्थ के दस्तक का। था सृष्टा का वह अमर दीप,

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mahatma gandhi

महात्मा गांधी जी पर कविता

हिंदी कविता

महात्मा गांधी जी पर कविता निडरता थी शान उनकी, निडरता थी पहचान ।ब्रम्हचर्य का जीवन जीयो ,करना है सम्मान ।। सत्य बोलना ,चोरी न करना, यही है उनका मान। एकता ही है नाम उनका, एकता ही है पहचान ।। अहिंसा के पथ पर चलें, और लड़े अंग्रेजो से।देश की आजादी के लिए, न डरे किसी

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dr bhimrao ambedkar

बाबा साहिब सा सूरमा–राकेश राज़ भाटिया

नारी जीवन और संवेदना

बाबा साहिब सा सूरमा -राकेश राज़ भाटिया बदलती रहेगी यह दुनिया, बदलेगा यह दौर ए जहाँ .न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सूरमा .. वो जिसने कक्षा के बाहर बैठकर ज्ञान का दीया जला लिया .वो जिसने अपनी मेहनत से, विद्या का सागर पा लिया .वो जिसने संविधान बनाकर बदल दिया

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भगत सिंह पर कविता

हिंदी कविता

भगत सिंह पर कविता 28 सितंबर सन् 1907 को भारत की धरती पर, एक लाल ने जन्म लिया । माता विद्यापति की आंखों का तारा , पिता का अरमान था । दादी ने उसका ‘भागो’ रखा नाम था, फौलादी थी बाहें उसकी । जिसके सिर पर केसरिया बाना था , दूर फिरंगी को करने का

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प्राकृतिक आपदा पर कविता

हिंदी कविता

प्राकृतिक आपदा अति मानव वाचालता के कारण आती है और क्या क्या मानव पर प्रभाव डालती है? इस रचना में जानिए।

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