आओ बुद्ध की शरण में चलें

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मानव चहुँ ओर से
भरता है चीत्कार-दहाड़।
गलत मार्ग अनुशरण करके
खड़े किये दुख के पहाड़।
ठोकर खाकर गिरता, उठता
भूलों से वो कम ही सीखता ।
अंधी आस्था आंखों के जाले
यथार्थ की धरा कम ही दिखता।
बुरे कर्मों से आचरण हुई अशुद्ध ।
ऐसे में हाथ थामेगा एकमात्र “बुद्ध “
आओ बुद्ध की शरण में चलें।
बुद्ध के संग जीलें ,मर लें।
हो जायेगा जीवन सार।
गौतम बुद्ध की जय जयकार ।
बुद्ध ने कहा कि सर्वव्यापी है दुख।
जितना भागोगे वो मिलेगी सम्मुख।
अष्टांगिक मार्ग को अपनाके ही ,
जीवन में आये सफलता और सुख।
धीरे धीरे हम भी चलो हो जायें प्रबुद्ध ।
सम्यक् संकल्प हो तो  साथ देगा ” बुद्ध ” ।
आओ बुद्ध की शरण में चलें ।
बुद्ध के संग जीलें, मर लें ।
हो जायेगा जीवन सार ।
गौतम बुद्ध की जय जयकार ।
यम, नियम ,आसन ,प्रणायाम
प्रत्याहार ,धारणा ,ध्यान,समाधि ।
जिनको जीवन में उतारके ही,
मिटेगी सकल दुख और व्याधि।
तज दें हिंसा, चोरी और होना क्रुद्ध ।
बंधनमुक्त होकर संयम से बनें “बुद्ध”।
आओ बुद्ध की शरण में चलें ।
बुद्ध के संग जीलें, मर लें ।
हो जायेगा जीवन सार ।
गौतम बुद्ध की जय जयकार ।

( मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़ )
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़