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त्यौहार पर कविता-तेरस कैवर्त्य ‘आंसू’

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त्यौहार पर कविता

आया कार्तिक मास अब, साफ करें घर द्वार।
रंग बिरंगे लग रहे, आया है त्यौहार।।१।।

गली गली में धूम है , जलती दीप कतार।
सभी मनाये साथ में, दीवाली त्यौहार।।२।।

श्रद्धा सुमन चढ़ा करें, पूजे लक्ष्मी मान।
मेवा घर घर बांटते , नया पहन परिधान।।३।।

सुमत सहज ही बांध के, आये जब त्यौहार।
महक दहक बहती हवा, देख खुशी परिवार।।४।।

बैर भाव को छोड़ के, निज मन सुर कर गान।
दया धरम के राह चल, तभी मिलेगा मान।।५।।

तेरस कैवर्त्य ‘आंसू’ सोनाडुला बिलाईगढ, जिला – बलौदाबाजर (छ. ग.)
              
           
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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