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अखिल विश्व तेरा गगन हो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचना के माध्यम से जीवन में ऊँचाइयों के मापदंड बताये गए हैं जहां आसीन होकर मनुष्य स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर सकता है |
अखिल विश्व तेरा गगन हो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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अखिल विश्व तेरा गगन हो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

अखिल विश्व तेरा गगन हो
रत्नाकर सा तेरा जीवन हो
नरेश सा तू राज करना
हर दिलों में वास करना

अखिल विश्व तेरा गगन हो
रत्नाकर सा तेरा जीवन हो

कोविद सा तू पावन हो
धरा सा तू अचल हो
कांति महके हर दिशा में
सम्पूर्ण धरा तेरा आँचल हो

अखिल विश्व तेरा गगन हो
रत्नाकर सा तेरा जीवन हो

संघर्ष तेरा कर्मक्षेत्र हो
निर्वाण तेरा अंतिम सत्य हो
सहचर प्रकृति तेरी हो
सरस्वती का तू वन्दनीय हो

अखिल विश्व तेरा गगन हो
रत्नाकर सा तेरा जीवन हो

महक तेरी चहुँओर फैले
वैरागी सा तेरा जीवन हो
महेश सा रौद्र हो तुझमे
नारद सा तू चपल हो

अखिल विश्व तेरा गगन हो
रत्नाकर सा तेरा जीवन हो

प्रज्ञा तेरी सहचर बने
पर्वत सा तू अटल हो
नैसर्गिक ऊर्जा हो तुझमे
गजानन वरद हस्त हो तुझ पर

अद्वितीय मनाव बने तू
जगत में तू अमर हो
अखिल विश्व तेरा गगन हो
रत्नाकर सा तेरा जीवन हो

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