कविता 01 अन्न की कीमत -मनीभाई नवरत्न

कविता01
अन्न की कीमत
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एक एक दाना बचा ले।
जो खाया खाना पचा ले।
क्यूँ बर्बादी करने को तुला है?
स्वार्थी बन इंसानियत को भुला है।
क्या हुआ कि तेरा पैसा है?
गरीब की भूख भी तो
हम ही जैसा है ।
आखिर क्या मिलता ?
जूठाकर फेंकना ।
जरूरत से ज्यादा हमें,
रोटी क्यूँ सेंकना ?
मत भूल कि,
ये किसानों की गाढ़ी कमाई है।
जिसने पसीने से सींचकर,
ये सोना पाई है।
स्वाद के वशीभूत होके ,
जिह्वा का कहा मत मान ।
ठूंस-ठूंसकर खाके
उदर को पाख़ाना न जान ।
मितव्ययिता का अर्थ
कब तुझे समझ आयेगा ?
आधी आबादी ही जब
भूखा मारा जायेगा ?
तू पूजा करता
 धन को देवी बनाकर ,
अन्न भी तो देवी स्वरूप है।
अब तो जाग,
मत बन भोगी
उतना ही थाल में रख  ,
जितना तेरा भूख है।
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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