KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

अंतः प्रेरणा कविता

यह रचना उल्लाला छंद है जो अंतः प्रेरणा से संबंधित है।
कवयित्री पद्मा साहू “पर्वणी”
खैरागढ़ छत्तीसगढ़

0 935

दिनांक 29 /04/ 2021
उल्लाला छंद सृजन शब्द
मात्राभार 15, और 13

अंतः प्रेरणा

निज उर की अंतः प्रेरणा, सम्मोहक उद्धार है ।
अंतः पुर का आत्म बल , मनुज विजय आधार है।।

मन प्रेरित अंतः प्रेरणा , पूरित करती लक्ष्य है।
आवेगो की पहचान कर , नाहक करती भक्ष्य है।।

जागृत कर अंतः प्रेरणा , मूल पाप का जान लो ।
छल छिद्र कपट को त्यागकर, मूल धर्म पहचान लो।।

निज भुजबल से ही बल मिले, छोड़ो दूजे आस को ।
तरंगिणी अंतः प्रेरणा, फिर क्यों तड़पे प्यास को।।

आत्मशक्ति अंतः प्रेरणा, सुखकर अंतर्ध्यान है।
तज जागृत स्वप्न सुसुप्त को, तुर्यातित सत ज्ञान है।।

पद्मा साहू ” पर्वणी”
खैरागढ़ राजनांदगांव छत्तीसगढ़

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.