वोट- विनोद सिल्ला
कविता बहार दिवस आधारित रचनाओं का भंडार

वोट- विनोद सिल्ला

वोट- विनोद सिल्ला तेरा वोट उन्हेंबैठा देगासिंहासन परलगा देगाउनकी गाड़ी परलाल बत्तीवो अपनों कोठेके दिलवाएंगेआला अधिकारियों कीकसरत करवाएंगेलूट-लूट के वतन को खाएंगेपूरे पाँच सालबदले मेंतुझे क्या मिलेगाबस एक बोतल शराबजिसका…

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खुशबु-विनोद सिल्ला

खुशबु फूलों मेंहोती है खुशबुनहीं होती फूलों में हीहोती हैकुछ व्यक्तियों केव्यवहार में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों केकिरदार में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों केस्वभाव में भीहोती हैकुछ व्यक्तियों कीप्रवृत्ति में भीहोती हैकुछ…

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दहेज दानव

दहेज सामाजिक बुराई पर आधारित कविता

टिप्पणी बन्द दहेज दानव में

नास्तिक

नास्तिक नास्तिक ही पैदा हुआ था मैं बाकी भी होते हैं पैदा नास्तिक ही मानव मूल रूप में होता है नास्तिक नाना प्रकार के प्रपंच करके उसे बनाया जाता है…

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असली आनंद

असली आनंद मुझे है पूरा विश्वास नहीं है असली आनंद मठों-आश्रमों व अन्य धर्म-स्थलों में इन सब के प्रभारी लालायित हैं लोकसभा-राज्यसभा या फिर विधानसभा में जाने को मुझे है…

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वह था मात्र इंसान

वह था मात्र इंसान आदिकाल में मानव नहीं था क्लीन-शेवड नहीं करता था कंघी लगता होगा जटाओं में भयावह-असभ्य लेकिन वह था कहीं अधिक सभ्य आज के क्लीन-शेवड फ्रैंचकट या…

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ख्याल न आया

ख्याल न आया पहली रोटी गाय को दी अंतिम रोटी कुत्ते को किड़नाल को सतनजा भी डाल आया मछलियों को आटा भी खिलाया श्राद्ध में कौवों को भी भौज कराया…

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