कभी इन्सां है क्या समझा नहीं था

कभी इन्सां है क्या समझा नहीं था ख़ुदा को इसलिए पाया नहीं था हमारा प्यार रूहों का मिलन था फ़क़त जिस्मों तलक़ फैला नहीं था बिताई उम्र सारी मुफ़लिसी में…

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