KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पेड़ बुलाते मेघ -हाइकु संग्रह की समीक्षा , हाइकुकार-रमेश कुमार सोनी एवं समीक्षक-डॉ.पूर्वा…

हाइकु एक जापानी विधा की लेखन शैली है जिसमें कविता का होना अनिवार्य होता है.यह मेरा दूसरा हाइकु संग्रह है.इसकी भूमिका वरिष्ठतम हाइकुकार डॉ.सुधा गुप्ता जी -मेरठ…

झूला झूले फुलवा- ताँका संग्रह की समीक्षा

मेरी यह पुस्तक -' झूला झूले फुलवा ' - हिंदी ताँका की विश्व मे पहली इ पुस्तक है। इसकी समीक्षा ज्योत्सना प्रदीप -विख्यात साहित्यकार ने की है। ताँका एक जापानी…

साइकिलों पर घर

साइकिलों पर घर अलग-अलग पगडंडियों सेगाँवों के मजदूरअपनी जरूरतेंमुँह पर चस्पा किए साइकिलों से खटते हुएपहूँचते हैं शहर में ,शहर में है -उनके खून - पसीने को

बसंत के हाइकु

बसंत के हाइकु - रमेश कुमार सोनी 1 माली उठाते बसंत के नखरे भौंरें ठुमके। 2 बासंती मेला फल-फूल,रंगों का रेलमपेला। 3 फूल ध्वजा ले

कोई आखिरी दिन नहीं होता

कोई आखिरी दिन नहीं होता ज़माना भूल चुकाउन्हें जिन्होंने कभी प्यार को खरीदना चाहा,मिटाना चाहा, बर्बाद करना चाहा-प्रेमी युगलों को सदा सेलेकिन वे आज भी जिन्दा

जूड़े का गुलाब

जूड़े का गुलाब स्त्री और धरती दोनों में से बहुत लोगों ने सिर्फ स्त्रियों को चुना और प्रेम के नाम पर उनके पल्लू और जूड़ों में बँध गए; प्रदूषणों का श्रृंगार किए…

मुस्कुराता हुआ प्रेम

मुस्कुराता हुआ प्रेम प्रेम नहीं कहता कि– कोई मुझसे प्रेम करे प्रेम तो खुद बावरा है घुमते–फिरते रहता है अपने इन लंगोटिया यारों के साथ– सुख–दुःख,घृणा,बैर,यादें और

बधाई हो तुम…

बधाई हो तुम... भुट्टा खाते हुएमैंने पेड़ों पर अपना नाम लिखातुमने उसे अपने दिल पे उकेर लिया,तुमने दुम्बे को दुलारामेरा मन चारागाह हो गया;मैंने पतंग उड़ाईतुम

कब्र की ओर बढ़ते कदम -रमेशकुमार सोनी

कब्र की ओर बढ़ते कदम -रमेशकुमार सोनी पतझड़ में सूखे पत्ते विदा हो रहे हैंविदा ले रहे हैं, खाँसती आवाज़ें ज़माने सेकुछ पल जी लेने की खुशी सेवृद्धों का झुंड