KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मुझे स्त्री कहो या कविता

शीर्षक-आस मुझे स्त्री कहो या कवितामुझे गढ़ों या ना पढ़ोंमुझे भाव पढ़ना आता है।खुबसूरती का ठप्पा वाह मेंकभी प्रथम पृष्ठ अखबार मेंकिसी घर में,किसी गुमनामी राह