KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

‘सुसंस्कृत मातृभाषा’

शीर्षक : 'सुसंस्कृत मातृभाषा' ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अपनी स्वरों में मुझको 'साध' लीजिए। मैं 'मृदुला', सरला, ले पग-पग आऊँगी।। हों गीत सृजित, लयबद्ध…

हम किधर जा रहे हैं ?

शीर्षक : हम किधर जा रहे हैं ? ********************* क़यास लगाए जा रहे हैं, कि हम ऊपर उठ रहे हैं, क़ायम रहेंगे ये सवालात, कि हम किधर जा रहे हैं? कल,…