‘सिद्धार्थ, तुम्हें ‘बुद्ध’ बनकर आना ही होगा’
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‘सिद्धार्थ, तुम्हें ‘बुद्ध’ बनकर आना ही होगा’

"सिद्धार्थ, तुम्हें 'बुद्ध' बनकर आना ही होगा" ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सिद्धार्थ! ऐसा क्यों ? फिर चले गये, सत्य, दिव्य-ज्ञान की खोज, अपलक राह देखती, नि:शब्द खड़ी, यशोधरा! दुःख, दूर कैसे, स्वार्थ, संलिप्त…

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‘सुसंस्कृत मातृभाषा’

शीर्षक : 'सुसंस्कृत मातृभाषा' ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अपनी स्वरों में मुझको 'साध' लीजिए। मैं 'मृदुला', सरला, ले पग-पग आऊँगी।। हों गीत सृजित, लयबद्ध 'ताल' दीजिए। मधुरिमा, रस, छंद, सज-धज गाऊँगी।। सम्प्रेषित 'भाव'…

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हम किधर जा रहे हैं ?

शीर्षक : हम किधर जा रहे हैं ? ********************* क़यास लगाए जा रहे हैं, कि हम ऊपर उठ रहे हैं, क़ायम रहेंगे ये सवालात, कि हम किधर जा रहे हैं?…

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