रिश्ते

*रिश्ते* ***************************** दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया रिश्तों की तपिश से झुलसता चला गया अपनों और बेगानों में उलझता चला गया दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया कुछ अपने…

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श्वेत वसन

*श्वेत वसन* •••••••••••••••• सफेद साड़ी में लिपटी विधवा आँसुओं के चादर में सिमटी विधवा मनहूस कैसे हो सकती है भला अपने बच्चों को वह विधवा रोज सबेरे जगाती है उज्जवल…

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बेटी का दर्द

विषय- *बेटी का दर्द* *************************** अब तो लगने लगा है मुझको कोख में ही माँ मुझको कुचलो बाहर का संसार है सुंदर ऐसा लगता है कोख के अंदर पर जब…

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हमसफर

सात फेरों से बंधे रिश्ते ही *हम सफर*नहीं होते कई बार *हम* होते हुए भी *सफर* तय नहीं होते कई बार दूर रहकर भी दिल से दिल की डोर जुड़…

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बेटी का दर्द

*बेटी का दर्द* ********************** अब तो लगने लगा है मुझको, कोख में ही माँ मुझको कुचलो। बाहर का संसार है सुंदर, ऐसा लगता है कोख के अंदर। पर जब पढ़ती…

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श्वेत वसन-वर्षा जैन “प्रखर”

*श्वेत वसन* •••••••••••••••• सफेद साड़ी में लिपटी विधवा आँसुओं के चादर में सिमटी विधवा मनहूस कैसे हो सकती है भला अपने बच्चों को वह विधवा रोज सबेरे जगाती है उज्जवल…

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दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया

दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया रिश्तों की तपिश से झुलसता चला गया अपनों और बेगानों में उलझता चला गया दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया कुछ अपने भी ऐसे…

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विश्व बचत दिवस: मितव्ययता का महत्व बताती वर्षा जैन “प्रखर” की यह शानदार कविता, आप जरूर पढ़िये

*विश्व बचत दिवस* **********************खुशियाँ मोहताज नहीं पैसों कीयह तो सत्य है मेरे भाई। फिर भी मुस्कान नहीं होठों परजब तक हाथ में ना हो पाई। फिजूलखर्ची से बचो ही हरदमखर्च करो तुम…

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कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” द्वारा रचित दीपावली की कविता जो कि आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा दे रही है।

------------------------------*दीपावली* की पावन बेलामहकी जूही, खिल गई बेला*धनवंतरि* की रहे छायानिरोगी रहे हमारी काया*रूप चतुर्दशी* में निखरे ऐसेतन हो सुंदर मन भी सुधरेमहालक्ष्मी की कृपा परस्परहम सब पर हरदम ही…

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प्रकाश-वर्षा जैन “प्रखर”(prakash)

*प्रकाश*--------------मन के अंध तिमिर में क्याप्रकाश को उद्दीपन की आवश्यकता है? नहीं!! क्योंकि आत्म ज्योति काप्रकाश ही सारे अंधकार को हर लेगाआवश्यकता है, तो बस अंधकार को जन्म देने वाले कारक को हटाने कीउस…

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