भाईदूज विशेष: एक सैनिक की भाई दूज जब वह बहन के पास नहीं आ पाता तो अपनी बहन के पास ये पैगाम भेजता है जिसे कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना ने कविता के माध्यम से व्यक्त की है

*भाई दूज*

मैं डटा हूँ सीमा पर
बनकर पहरेदार
कैसे आऊँ प्यारी बहना
मनाने त्यौहार
याद आ रहा है बचपन
परिवार का अपनापन
दीपों का वो उत्सव
मनाते थे शानदार
भाई दूज पर मस्तक टीका
रोली चंदन वंदन
इंतजार तुम्हें रहता था
मैं लाऊँ क्या उपहार
प्यारी बहना मायूस न होना
देश को मेरी है जरूरत
हम साथ जरूर होंगे
भाई दूज पर अगली बार
कविता पढ़कर भर आयी
बहना तेरी अखियाँ
रोना नहीं तुम पर
करता हूँ खबरदार
चलो अब सो जाओ
करो नहीं खुद से तकरार
सपना देखो, ख्वाब बुनो
सबेरा लेकर आयेगा शुभ समाचार

अनिता मंदिलवार सपना
अंबिकापुर सरगुजा छतीसगढ़

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