कविता 03 भविष्य में ये कौन है? -मनीभाई नवरत्न

कविता 03
भविष्य में ये कौन है?
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भविष्य में ये कौन है?
जो मुंह फाड़के
मुझे भय दिखा रहा।
चीखें आती है इससे
रोंगटे खड़ी कर देने वाली।
कल तक तो दिखता था
स्वर्णिम प्रभात के किरणें,
अब तो नीरव घनघोर
काली प्रतिमायें
अपने नेत्र लाल से
लपलपा रही है जीभ।
दिखाई पड़ रही है मुझे
मास्क पहने मनुज,
चूंकि शीतल स्वच्छ समीर
बहती नहीं स्वच्छंद।
टंकियों से डलवाते
मुख में दो घूंट पानी।
यंत्रवत जीवन भांति
हो गई वाहन सी दशा।
खंडहर टापू में एकत्र
चीटियों सा जन सैलाब।
चहुँ ओर बवंडर में फंसी
मुंह तांकती किसी यान का
जो ले चलें मंगल की ओर।
भुख से तड़पते,
रोग से कराहते
बन बैठे हैं सब जान के प्यासे।
अब पेड़ से इंतजार नहीं
कब भोजन मिले फल का?
टहनी पत्तियों में भी आती
गजब का मिठास।
मैं नींद में
अपने मौत को पाता
इससे पहले कुछ दार्शनिक
जलाते दिखे मशाल।
लगाते दिखे पेड़,
करते नालियों की सफाई।
उनके कर्म में नेकी
और दिल में अच्छाई।
आपसी दुश्मनी छोड़,
शांतिपूर्ण सहभाव से
वचन लिया
कदम न रखने का
अपने सीमा के बाहर।
लोग जुड़ रहे हैं
गाँव जुड़ रहा
इस भांति से शहर से होते हुए
हर प्रांत, हर देश जुड़ रहा।
अब बदल रहा विश्व अपना भेष।
सब एक हो रहे, नहीं देश-विदेश।
🖊मनीभाई नवरत्न छत्तीसगढ़

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़