अवसर मिलें तो आदर्श बनती हैं नारियाँ
समाज और यथार्थमहिलाओं को सही राह मिले तो वे सफलता का आकाश चूम सकती हैं.
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महिलाओं को सही राह मिले तो वे सफलता का आकाश चूम सकती हैं.
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हिन्दी के नवांकुर लेखक डा. आनंद कश्यप का प्रथम उपन्यास ” गांधी चौक ” केवल एक कहानी नहीं है. बल्कि छत्तीसगढ़ के संघर्षरत युवाओं की यथास्थिति का यथार्थ चित्रण है. चूंकि लेखक स्वयं एक प्रतियोगी हैं, तो उपन्यास में उन्होंने भावों के साथ अपनी आत्मा भी पिरो दी है.
उपन्यास गांधी चौक ‘ जैसा मेंने समझा Read More »
नारी सौंदर्य – एक काव्य दृष्टि में
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पिछड़ा वर्ग के संबंध नये कानून के संदर्भ में आयोजित संसद के सत्र में महिला सांसदों के साथ बदसलूकी की गई है.
महिला सांसदों पर मार्शल बल का प्रयोग – Read More »
बिटिया की शादी कर दूँगा गीत (१६,१६) अब के सब कर्जे भर दूँगा,बिटिया की शादी कर दूँगा।। खेत बीज कर करी जुताई,अब तो होगी बहुत कमाई।शहर भेजना, सुत को पढ़ने।भावि जीवनी उसकी गढ़ने।गिरवी घर भी छुड़वा लूँगा,बिटिया की शादी कर दूँगा।। फसल बिकेगी,चारा होगा,दुख हमने तो सारा भोगा।अब वे संकट नहीं रहेंगे,सहा खूब,अब नहीं सहेंगे।दो
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पंजाब धरा का सिंह शूर विधा-पदपादाकुलक राधेश्यामी छंद पर आधारित गीत। पंजाब धरा का सिंह शूर, फाँसी पर हंसकर झूल गया।बस याद उसे निज वतन रहा,दुनियादारी सब भूल गया। माँ की गोदी का लाल अमर,था गौरव पितु के मस्तक का।उस आँगन देहरी द्वार गली,है नमन तीर्थ के दस्तक का। था सृष्टा का वह अमर दीप,
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महात्मा गांधी जी पर कविता निडरता थी शान उनकी, निडरता थी पहचान ।ब्रम्हचर्य का जीवन जीयो ,करना है सम्मान ।। सत्य बोलना ,चोरी न करना, यही है उनका मान। एकता ही है नाम उनका, एकता ही है पहचान ।। अहिंसा के पथ पर चलें, और लड़े अंग्रेजो से।देश की आजादी के लिए, न डरे किसी
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बाबा साहिब सा सूरमा -राकेश राज़ भाटिया बदलती रहेगी यह दुनिया, बदलेगा यह दौर ए जहाँ .न हुआ है, न होगा कभी भी, बाबा साहिब सा सूरमा .. वो जिसने कक्षा के बाहर बैठकर ज्ञान का दीया जला लिया .वो जिसने अपनी मेहनत से, विद्या का सागर पा लिया .वो जिसने संविधान बनाकर बदल दिया
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भगत सिंह पर कविता 28 सितंबर सन् 1907 को भारत की धरती पर, एक लाल ने जन्म लिया । माता विद्यापति की आंखों का तारा , पिता का अरमान था । दादी ने उसका ‘भागो’ रखा नाम था, फौलादी थी बाहें उसकी । जिसके सिर पर केसरिया बाना था , दूर फिरंगी को करने का
प्राकृतिक आपदा अति मानव वाचालता के कारण आती है और क्या क्या मानव पर प्रभाव डालती है? इस रचना में जानिए।
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“बापू” ( राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर कविता ) सत्य अहिंसा के तुम ही पहरेदार हो बापू,आजादी दिलाने वाले बड़े सरदार हो बापू। हर बच्चा तुम्हें दिन रात याद करता है,हर इंसा तुम्हारा ही गुणगान करता है।सच्ची श्रद्धा से ही मिलती है सफलता,हर इस कामयाबी का बखान करता है।आजादी दिलाने के सही हकदार हो बापू। देश
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छीन लिए सब गड़े दफीने धरा गाल हँसते हम देखे,जल कूपों मय चूनर धानी।घाव धरा तन फटी बिवाईमानस अधम सोच क्यूँ ठानी।। शस्य श्यामला कहते जिसकोपैंड पैंड पर पेड़ तलाईशेर दहाड़ें, चीतल हाथीजंगल थी मंगल तरुणाई ग्रहण लगा या नजर किसी की,नूर गये माँ लगे रुहानीधरा गाल हँसते ……….।। वसुधा को माता कह कह करछीन
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