छठ का दिवस पुनीत: एन्०पी०विश्वकर्मा

उदय- अस्त दोनों समय,
नित्य नियम से सात।
सूर्य परिक्रमा के कहें,
अन्तर्मन की बात।।
प्रतिदिन दर्शन दे रहे,
सूर्य देव भगवान।
छठ पूजा का है बना ,
जग मे उचित विधान।।
सूर्य भक्त क कठिन व्रत,
करते उन्हें प्रसन्न।
प्रभु पूषा भी भक्त की,
हरते दुख -आसन्न।।
गतियों से ऋतुएँ बनी,
पावस -गर्मी-शीत।
मानव का सब डर हरें,
बनकर उनका मीत।।
देव-दनुज-मानव सभी,
आराधन की रीत।
मना सदा पूजा करें,

छठ का दिवस पुनीत ।।

एन्०पी०विश्वकर्मा, रायपुर 🙏


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