KAVITA BAHAR
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महान लोगों पर दोहे

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महान लोगों पर दोहे

देना  हो  दातार  तो, दे  शबरी   सी   प्रीत।
पवन तनय सी भक्ति दे,कर्ण सरीखा मीत।।


भ्राता देना लखन सा,यसुदा जैसी मात।
राम सरीखा पुत्र हो, दशरथ जैसा तात।।


राधा जैसी प्रिया हो,कर्ण सरीखा मीत।
भाग्य सुदामा से भले,तानसेन से गीत।।


अक्खड़ पना कबीर सा,रस जैसे रसखान।
अर्जुन  जैसी   नींद  दे,  गीता  जैसा  ज्ञान।।


रिश्ते साथी कृष्ण से, बर्बरीक  से बान।
तुलसी सा वैराग्य दे, सूरदास  सा मान।।


कूटनीति चाणक्य सी,विदुर  सरीखी नीति।
चन्द्र गुप्त सा बल मिले, मीरा जैसी  प्रीति।।


रावण जैसा ज्ञान दे ,हठ हम्मीर  समान।
राणा जैसी आन दे, चेतक  जैसा  मान।।


पन्ना  जैसा त्याग दे, चंदन  सा  बलिदान।
पृथ्वी राज चौहान सा,देना तुम अभिमान।।


वीर शिवा  सी  वीरता ,सांगा  जितने  घाव।
भूषण सी कविता लिखा,सतसैया से भाव।।


देना हो  सन्यास  तो, बना विवेकानंद।
दयानंद  सा धीर दे, परमहंस  आनंद।।


चतुर बनाए तो प्रभो, ज्यों तेनाली राम।
दशरथ माँझी दे बना,परमारथ के काम।।


साहस बोस सुभाष सा,दे मुझको दातार।
लाल बाल अरु पाल से,देना मुझे विचार।।


हरिश्चन्द्र सा सत्य दे, बाली सा  वरदान।
पतंजली  सा योग दे, भामाशाही  दान।।


भगत सिंह सी मौत दे, शेखर  सी  पिस्तोल।
ऋषि दधीचि सी देह दे,गुरु नानक  से बोल।।


कफन तिरंगा रंग दे,जनगणमन का गान।
वतन शहीदी शान दे, बलिदानी  अरमान।।

    
मातृभूमि की गोद मे ,हिन्दी हिन्दुस्तान।
भारत  मेरा  देश  हो, जन्मूँ  राजस्थान।।


✍✍

बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान

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