ढूँढूँ भला खुदा की मैं रहमत

बहर:- 221  2121  1221  212


ढूँढूँ भला खुदा की मैं रहमत कहाँ कहाँ,
अब क्या बताऊँ उसकी इनायत कहाँ कहाँ।
सहरा, नदी, पहाड़, समंदर ये दश्त सब,
दिखलाए सब खुदा की ये वुसअत कहाँ कहाँ।
हर सिम्त हर तरह के दिखे उसके मोजिज़े,
जैसे खुदा ने लिख दी इबारत कहाँ कहाँ।
सावन में सब्जियत से है सैराब ये फ़िज़ा,
बहलाऊँ मैं इलाही तबीअत कहाँ कहाँ।
कोई न जान पाया खुदा की खुदाई को,
(ये गम कहाँ कहाँ ये मसर्रत कहाँ कहाँ।)
अंदर जरा तो झाँकते अपने को भूल कर,
बाहर खुदा की ढूँढते सूरत कहाँ कहाँ।
रुतबा-ओ-जिंदगी-ओ-नियामत खुदा से तय,
इंसान फिर भी करता मशक्कत कहाँ कहाँ।
इंसानियत अता तो की इंसान को खुदा,
फैला रहा वो देख तु दहशत कहाँ कहाँ।
कहता ‘नमन’ कि एक खुदा है जहान में,
जैसे भी फिर हो उसकी इबादत कहाँ कहाँ।
सहरा = रेगिस्तान
दश्त = जंगल
वुअसत = फैलाव, विस्तार, सामर्थ्य
सिम्त = तरफ, ओर
मोजिज़े = चमत्कार (बहुवचन)
सब्जियत = हरियाली
सैराब = भरा हुआ
मसर्रत = खुशी

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; निवास स्थान - तिनसुकिया (असम) रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। whatsapp के कई ग्रुप से जुड़ा हुआ हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं। Blog - https://www. nayekavi.blogspot.com