KAVITA BAHAR
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दीदार का तेरे इन्तजार है मुझको- ग़ज़ल – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचना में कवि खुदा के एहसास को अपने करीब महसूस कर रहा है उसे उस खुदा पर पूरा – पूरा एतबार है |
दीदार का तेरे इन्तजार है मुझको- ग़ज़ल – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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दीदार का तेरे इन्तजार है मुझको- ग़ज़ल – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

तू यहीं कहीं आसपास है, ये एतबार है मुझको
मै तुझको ढूंढूं , ऐसी जुर्रत मै कर नहीं सकता
तू हर एक सांस में बसता है , ये एतबार है मुझको

मक्का हो या मदीना, जहां में सब जगह
तेरे नाम का सिक्का है, ये एतबार है मुझको
दीदार का तेरे, एतबार है मुझको

किस्सा-ए-करम तेरा, बयान मै क्या करूं
हर शै में तेरा नाम, हर जुबान पे तेरा नाम
खुशबू तेरा एहसास, ये एतबार है मुझको

पलती है जिंदगी, एक तेरी कायनात में
खिलता है तू फूल बनकर, ये एतबार है मुझको
दीदार का तेरे, एतबार है मुझको

मेरे पिया तेरा करम, तेरी इनायत हो
जियूं तो तेरा नाम, मेरे साथ-साथ हो
मेरा सारा दर्द तेरा, ये एहसास है मुझको

तेरा आशियाना हो, आशियाँ मेरा
तू रहता है साथ मेरे, ये एतबार है मुझको
दीदार का तेरे, एतबार है मुझको

जीता हूँ तेरे दम से, जीता हूँ तेरे करम से
हर एक आह मेरी, करती परेशां तुझको
तू हर दुःख में साथ मेरे, ये एतबार है मुझको

कर दे तू राह आशां, कर दे तू पार मुझको
मरूं तो जुबान पे तू हो, ये एतबार है मुझको
दीदार का तेरे, एतबार है मुझको

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