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दिल में किसने मारा हथोड़ा -मनीभाई नवरत्न

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दिल में किसने मारा हथोड़ा -मनीभाई नवरत्न

दिल में किसी ने मारा हथोड़ा ।
और इसे चकनाचूर करके छोड़ा।
हर किसी ने रूख इससे मोड़ा ।
सबसे दूर करके तनहा छोड़ा।


पागल बना देती है यह दुनिया, जो जुदा हो साथी ।
दिल घायल हो जाती है , जो खफा हो साथी।
घुट रहा दिल इस तरह जैसे किसी ने इसका गर्दन मरोड़ा।


बातें अब तो खुद से करने लगी है जैसे दिल बावला हो ।
डगमगा कर चलने लगी है जैसे कोई मतवाला हो. ।
शीशा समझ के इसे किसी ने, हाय पत्थर से तोड़ा।।

मनीभाई नवरत्न

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