कवयित्री कुसुम लता पुंडोरा द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित कविता, जिसमें यह सुंदर ढंग से बताई गई है कि दीपावली कैसे मनाई जाये

*दीपावली*  
जोश उमंग घर आँगन छाए,
प्रकाश पर्व दीवाली आई ।
अंधकार अंतस का हरने,
 दीपों की रोशनी लाई ।
माटी के दीप जले घर आंगन,
रंगोली भी छटा बिखराए।
लक्ष्मी गणेश अर्चन वंदन 
प्रभु श्रीराम मंदिर में सजाए।
जलते दीपों के प्रकाश में,
जीवन तिमिर दूर भगाएँ ।
राग द्वेष को छोड़ दें हम,
मन से मन का दीप जलाएँ।
अब की बार दीवाली हम,
नए भाव के साथ मनाएँ।
बैर,नफ़रत को भुलाकर,
खुशियों से जग महकाएँ।
तमस दूर हो मन से हमारे,
स्वार्थ लोभ अहं मिटाएँ ।
अपनों को ही नहीं साथियों,
दुश्मन को भी गले लगाएँ।
झिलमिल दीप अवलि सी ,
जग को जगमग कर जाएँ ।
रूठे हैं जो सुजन हमसे ,
प्रेम मनुहार से उन्हें मनाएँ ।
अभिमान विनाश का मूल है,
इस आग में न जल पाएँ।
ज्ञानी रावण भी खाक हुआ,
संदेश धरा पर यह फैलाएँ ।
दीपोत्सव का पावन प्रकाश,
यत्र तत्र सर्वत्र फैलाएँ ।
प्रदूषण मुक्त रहे धरा,
आतिशबाजी नहीं जलाएँ।
मन वीणा झंकृत हो उठे,
जीवन सुखी स्वस्थ बनाएँ ।
पर्यावरण संरक्षण में हम ,
सक्रिय हो भूमिका निभाएँ ।
कुसुम लता पुंडोरा
नई दिल्ली
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