KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

एक पेड़ की दो शाखाएं

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एक पेड़ की दो शाखाएं ,
एक हरी तो एक सुखी ।
एक तनी तो एक झुकी।।
ऐसे ही जीवन में दो पहलू है
कोई जश्ने चूर है तो कोई दुखी।।
जब तक होठों में प्यास है ।
तब तक कोई उदास है ।।
खिलते हैं होंठ फिर से
जब प्यास बुझी बुझी ।।
ऐसे ही ….

जब दुनिया ही गोल है ,
फिर पैसे का क्या मोल है ?
समय ही अनमोल है ,तो
क्यों है तू रुकी रुकी ।।

ऐसे ही जीवन……