KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

एक पेड़ की दो शाखाएं

0 62
एक पेड़ की दो शाखाएं ,
एक हरी तो एक सुखी ।
एक तनी तो एक झुकी।।
ऐसे ही जीवन में दो पहलू है
कोई जश्ने चूर है तो कोई दुखी।।
जब तक होठों में प्यास है ।
तब तक कोई उदास है ।।
खिलते हैं होंठ फिर से
जब प्यास बुझी बुझी ।।
ऐसे ही ….

जब दुनिया ही गोल है ,
फिर पैसे का क्या मोल है ?
समय ही अनमोल है ,तो
क्यों है तू रुकी रुकी ।।

ऐसे ही जीवन……
You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.