हिन्दी गीत : गुलामी की कफन – मनीभाई नवरत्न

गुलामी की कफन जला के , सजाया है गुलिस्तान।

महकता रहे गुल सा , अपना प्यारा हिंदुस्तान ।।
आज फिर दस्तक दे ना कयामत की वो घड़ियां
आगाह करती है, मेरी गीत की दास्तान ।।

हम क्या थे ,क्या हो चले ।
शूरवीरों की शहादत से बनी वजूद खो चले ।
आज के दिन का मिलना नहीं था आसान।
अपने ही घर में रह गये थे बन कर मेहमान।
धीमा-धीमा सुलगा अपना स्वाभिमान।
जब भगत राजगुरु सुखदेव ने दी
फांसी में झूल की अपनी जान ।
आज फुल को खिलाने के बजाय
कांटे के बीज बो चले ।
शूरवीरों की शहादत से बनी वजूद खो चले।

कुछ भटक गए हैं इंसानियत से
फैला रहे आतंक का साया।
मजहब का नाम देकर ,
डरा-धमकाकर जन्नत को श्मशान बनाया ।
फिर से चलनी होगी उन राहों में
जिन राहों को बापू और बाबा ने दिखाया।
प्रेम की गठरी छोड़के नफरत की बोरी ढो चले ।
शूरवीरों की शहादत से बनी वजूद खो चले।।

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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