KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गुरू-मदन सिंह शेखावत ढोढसर

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“कुण्डलिया”

गुरू कुम्हार एक से,घड़ घड़ काडे खोट।
सुन्दर रचना के लिए,करे चोट पर चोट।
करे चोट पर चोट,शिष्य को खूब तपाये।
नेकी पाठ पढाय ,सत्य की राह बताये।
कहै मदन कविराय,बातपर कर अमल शुरू।
होगा भव से पार, मिल जाये पूरा गुरू।।

मदन सिंह शेखावत ढोढसर स्वरचित