KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हर तरफ है भ्रष्टाचार – आशीष कुमार

प्रस्तुत गीत का शीर्षक “हर तरफ है भ्रष्टाचार है” जोकि आशीष कुमार (मोहनिया, कैमूर, बिहार) की रचना है. इसे वर्तमान समाज में फैले भ्रष्टाचार को आधार मानकर रचा गया है. इस रचना के माध्यम से बताया गया है कि हमारे समाज में भ्रष्टाचार कितनी गहरी पैठ बना चुका है.

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हर तरफ है भ्रष्टाचार – आशीष कुमार

लूट खसोट का है व्यवहार
हर तरफ है भ्रष्टाचार
समाज का हो गया बंटाधार
हर तरफ है भ्रष्टाचार

लंबी लंबी लगी कतार
चढ़ावा यहां अब शिष्टाचार
काम निकाले चाटुकार
हर तरफ है भ्रष्टाचार

मेधा हो गई है बेकार
मजा ले रहे पैरोकार
हो रहे सपने उनके साकार
हर तरफ है भ्रष्टाचार.

डूबी लुटिया जो हैं ईमानदार
कुंठा के हो रहे शिकार
नौकरी तरक्की सबसे बेजार
हर तरफ है भ्रष्टाचार.

बदल रहा आचार-विचार
रिश्वत लगाती नैया पार
काले धन का है कारोबार
हर तरफ है भ्रष्टाचार.

निष्ठा हो गई तार तार
सब कुछ लेते हैं डकार
व्यवस्था हो गई है लाचार
हर तरफ है भ्रष्टाचार.

न्याय की है सबको दरकार
आंख मूंदे बैठी सरकार
पट्टी खुले तो मिटे अंधकार
हर तरफ है भ्रष्टाचार.

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