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हाथी पर बाल कविता

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हाथी पर बाल कविता

हाथी पर बाल कविता

हाथी पर कविता 1

हाथी आया झूम के,
धरती माँ को चूम के।

टाँगे इसकी मोटी हैं,
आँखें इसकी छोटी हैं।

गन्ने पत्ती खाता है,
लंबी सूँड़ हिलाता है।

सूपा जैसे इसके कान,
देखो-देखो इसकी शान ॥

हाथी पर कविता 2

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हाथी राजा कहाँ चले?
सूँड हिलाकर कहाँ चले?
हाथी राजा कहाँ चले?
सूँड हिलाकर कहाँ चले?

मेरे घर भी आओ न!
हलवा पूरी खाओ न!
मेरे घर भी आओ न!
हलवा पूरी खाओ न!

राजा बैठे कुर्सी पर,
कुर्सी बोली चटर-पटर! चटर-पटर!
राजा बैठे कुर्सी पर,
कुर्सी बोली चटर-पटर! चटर-पटर!
चटर-पटर! चटर-पटर!

हाथी राजा कहाँ चले,
सूँड हिलाकर कहाँ चले?
हाथी राजा कहाँ चले,
सूँड हिलाकर कहाँ चले?

मेरे घर भी आओ न!
हलवा पूरी खाओ न!
मेरे घर भी आओ न!
हलवा पूरी खाओ न!

राजा बैठे झुले पर,
झूला बोला चटर-पटर! चटर-पटर!
राजा बैठे झुले पर,
झूला बोला चटर-पटर! चटर-पटर!
चटर-पटर! चटर-पटर!

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