हिंदी दिवस : जन – जन की भाषा हिन्दी-अजय मुस्कान

जन – जन की भाषा हिन्दी-अजय मुस्कान

जन – जन की भाषा हिन्दी
हर मन की अभिलाषा हिन्दी
जीवन की पूर्ण परिभाषा हिन्दी
हर एक  जीवन की आशा हिन्दी
जन -जन की भाषा हिन्दी…..
हर मन की अभिलाषा हिन्दी…
देश को गौरव दिलाती हिन्दी
हमें एक सूत्र में  पिरोती  हिन्दी
आपसी  भाईचारे की भाषा हिन्दी
काल  से परे, कालजयी भाषा हिन्दी
जन – जन की भाषा हिन्दी….…..
हर मन की अभिलाषा हिन्दी …..
सुर, कबीर, तुलसी सबने ही लिखी हिन्दी
इतनी प्यारी अपनी, संस्कृत की बेटी हिन्दी
जन में हिंदी, मन में हिंदी, सबसे प्यारी हिन्दी
घर – घर रहती, हम सबके माथे की बिंदी हिन्दी
जन – जन की भाषा हिन्दी…………
हर मन की अभिलाषा हिन्दी……….
हमको भाती हिन्दी , सबको लुभाती हिन्दी
सरल,  मनोरम ,  मीठी  इतनी अपनी हिन्दी
कहे ‘अजय ‘ मान भी हिन्दी, सम्मान भी हिन्दी
अपनी पहचान भी  हिन्दी , स्वाभिमान भी हिन्दी
जन – जन की भाषा हिन्दी………
हर मन की अभिलाषा हिन्दी…….
…… अजय मुस्कान
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अजय कुमार "मुस्कान "

जन्म तिथि - 12 जनवरी 1972 पिता का नाम - श्री जटा शंकर मिश्र माता का नाम - श्रीमती भगवती मिश्र शिक्षा - डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग रोजगार - टाटा स्टील में कार्यरत पता - 32/ L5, क्रास रोड न0-5, एग्रिको, जमशेदपुर – 831009 ( मूल निवासी : मैथिल काशी नगरी ग्राम - बनगाँव, जिला - सहरसा , बिहार ) साहित्यिक विधा - छंदमुक्त कविता / गज़ल/ हास्य - व्यंग्य लेखन भाषा ज्ञान - हिंदी, मैथिली, अंग्रेजी उपलब्धि - दो संयुक्त प्रकाशित पुस्तकें १) प्यारी बेटियाँ- साहित्यपीडिया पब्लिशिंग २) सृजन गुच्छ ( प्रथम )- समदर्शी प्रकाशन  जमशेदपुर से बाहर कई मंचों पर प्रस्तुति  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन  विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित  तकनिकी क्षेत्र में कई राष्ट्रिय सम्मान