मातृभाषा हिंदी – बाबूलाल शर्मा

मातृभाषा हिंदी

हिन्दी भारत देश में, भाषा मातृ समान।
सुन्दर भाषा लिपि सुघड़, देव नागरी मान।।


आदि मात संस्कृत शुभे, हिंदी सेतु समान।
अंग्रेजी सौतन बनी , अंतरमन पहचान।।


हिन्दी की बेटी बनी, प्रादेशिक अरमान।
बेटी की बेटी बहुत, जान सके तो जान।।


हिन्दी में बिन्दी सजे, बात अमोलक तोल।
सज नारी के भाल से,अगणित बढ़ता मोल।।


मातृभाष सनमान से, बढ़े देश सम्मान।
प्रादेशिक भाषा भला, राष्ट्र ऐक्य अरमान।।


हिन्दी की सौतन भले, दे सकती है कार।
पर हिन्दी से ही निभे, देश धर्म संस्कार।।


हिन्दी की बेटी भली, प्रादेशिक पहचान।
बेटी की बेटी कहीं, सुविधा या अरमान।।


देश एकता के लिए, हिन्दी का हो मान।
हिन्दी में सब काम हो, नूतन हिन्द विधान।।

कोर्ट कचहरी में करें, हिन्दी काज विकास।
हिन्दी में कानून हो , प्रसरे हिन्द प्रकाश।।


विभिन्नता में एकता, भाषा हो प्रतिमान।
राज्य प्रांत चाहो करो, हिन्दी हिन्द गुमान।।


उर्दू,अरबी सम बहिन, हिन्दी धर्म प्रधान।
गंगा जमनी रीतियाँ, भारत भाग्य विधान।।


अंग्रेजी सौतन बनी, प्रतिदिन बढ़ता प्यार।
निज भाषा सद्भाव दे, पर भाषा तकरार।।


हिन्दी का सुविकास हो,जनप्रिय भाषा मान।
वेद ग्रंथ संस्कृत सभी, अनुदित कर विज्ञान।।


हिन्दी संस्कृत मेल से, आम जनो के प्यार।
मातृभाष सम्मान कर, हत आंगल व्यापार।।


सबसे है अरदास यह, हित हिन्दी जयहिन्द।
शर्मा बाबू लाल के, हिन्दी हृदय अलिन्द।।


बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञ
V/P…सिकदरा,303326. जिला…दौसा ( राज.)

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