KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

दोहा कैसे लिखें(How to write poetry in Doha )

दोहा कैसे लिखें

 
आओ दोहा सीखलें,शारद माँ चितलाय।
सीख छंद दोहा रचें,श्रेष्ठ सृजन हो जाय।।
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ग्यारह तेरह मात्रिका, दो चरणों में आय।
चार चरण का छंद है,दोहा सुघड़ कहाय।।
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प्रथम तीसरे चरण में,तेरह मात्रा आय।
दूजे चौथे  में गिनो, ये ग्यारह रह जाय।।
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चौबिस मात्रिक छंद है,कुलअड़तालिस होय।
सुन्दर दोहे जो लिखे, सत साहित्यिक जोय।।
 
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मात शारदा  सुमिर के, सुमिरो  देव  गणेश।
दोहा रचना सीखिए,कविजन सुमिर’महेश।।
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दोहा  छंदो मे लिखो ,कविजन  अपनी बात।
तेरह ग्यारह मात्रिका, अड़तालिस  हो जात।।
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प्रथम  तीसरे   चरण  में, तेरह  मात्रा  पूर।
गुरु लघु गुरु चरणांत हो,भाव भरे भरपूर।।
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विषम चरण के अंत में,लघु लघु लघु भी होय।
लय में गाकर देख लो, लय बाधा नहि होय।।
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द्वितीय चौथे  चरण  में, ग्यारह  मात्रा  होय।
सम चरणों  के अंत में,गुरु लघु  मात्रा जोय।।
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पचकल से शुरु मत करो,कभी चरण कविराइ
भाषा  भावों  में  भरो, देख   लीजिए  गाइ।।
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चरणों  के प्रारंभ में, जगण दोष  नहि आय।
नाम देव के होय तो, जगण दोष बचि पाय।।
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सम से ही चौकल सजे, त्रिकल त्रिकल से मान।
भाव भरे  मन  में  रचे, दोहे  सुन्दर  शान।।
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सम चरणों के अंत में,जो पचकल आजाय।
दोहा भी सुन्दर लगे, सृजन सुघड़ हो जाय।।
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दोहा  छंदो  में  लिखा ,दोहा  छंद  विधान।
शर्मा  बाबू  लाल ने, सीखें  रहित  गुमान।।
 

दोहा की परिभाषा:-  

       
दोहा चार चरणों का मात्रिक छंद होता है। प्रथम व तृतीय चरण में 13,13 मात्राएँ होती है। द्वितीय व चतुर्थ चरण में 11,11मात्राएँ होती है।
 
1.
प्रथम व तीसरे चरणांत में 212 (जैसे-मान है ) या 111{जैसे — कमल)
 
2..
दूसरे व चौथे चरणांत में 2 1(जैसे आव,मान,आमान अवसान)
 
3..
चरणों की शुरूआत कभी भी 5 मात्रा वाले शब्द (पचकल) से न हो।
 
4.
तर्ज में गुनगुना कर देखें लय भंग हो तो बदलाव करें। मात्रा स्वतः ही सही हो जाएगी।
 
5..
चरणों की शुरुआत जगण से (121) न हो। महेश,सुरेश,दिनेश ,गणेश आदि देव नाम मान्य है बाकी नही।।
जैसे…..
ऋचा बड़ा शुभ नाम है, वेदों जैसी भाष।
1 2  1 2  1 1  2 1 2,  2 2  2 2 2 1
            13.             ,             11
हिन्दी बिन्दी सम रखे,हरियाणा शुभ वास।।
2 2  2 2  1 1  1 2,1 1 2 2  1 1  2 1
             13       ,          11
रचियता:-
*बाबू लाल शर्मा,”बौहरा”*
*सिकंदरा,दौसा,राजस्थान*