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हसदेव नदी बचाओ अभियान पर कविता- तोषण कुमार चुरेन्द्र “दिनकर “

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हसदेव नदी बचाओ अभियान पर कविता

हसदेव नदी बचाओ अभियान पर कविता- तोषण कुमार चुरेन्द्र "दिनकर " - कविता बहार - हिंदी कविता संग्रह

रुख राई अउ जंगल झाड़ी
बचालव छत्तीसगढ़ के थाती ल
कोनों बइरी झन चीर सकय
हसदेव के छाती ल

किसम किसम दवा बूटी
इही जंगल ले मिलत हे
चिरइ चिरगुन जग जीव के
सुग्घर बगिया खिलत हे
झन टोरव पुरखा ले जुड़े
हमर डोर परपाटी ल
कोनों बइरी झन चीर सकय
हसदेव के छाती ल

चंद रुपिया खातिर
कोख ल उजरन नइ देवन
जल जंगल जमीन बचाए बर
आज पर न सब लेवन
खनन नइ देवन कहव मिलके
छत्तीसगढ़ के माटी ल
कोनों बइरी झन चीर सकय
हसदेव के छाती ल

कोइला के लालच म काबर
हमर जंगल उजड़ै गा
सुमत रहय हम सबके संगी
नीत नियम ह सुधरै गा
नइ मानय त टें के रखव
तेंदू सार के लाठी ल
कोनों बइरी झन चीर सकय
हसदेव के छाती ल

आदिवासी पुरखा मन के
जल जंगल ह चिन्हारी हे
एकर रक्षा खातिर अब
हमर मनके पारी हे
कोनों  ल लेगन नइ देवन
महतारी के छांटी ल
कोनों बइरी झन चीर सकय
हसदेव के छाती ल

जल जंगल जमीन नइ रही त
हम हवा पानी कहां पाबो
बांचय हमर पुरखौती अछरा
अइसन अलख जगाबो
जुरमिलके हम रक्षण करबे
दिन देखन न राती ल
कोनों बइरी झन चीर सकय
हसदेव के छाती ल

तोषण कुमार चुरेन्द्र “दिनकर “
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद

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