KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जय जय जय जय हो गनेश -दूजराम साहू

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गनेश बंदना ( छत्तीसगढ़ी)

जय ,जय ,जय ,जय हो गनेश !
माता पारबती पिता महेश !!

सबले पहिली सुमिरन हे तोर ,
बिगड़े काज बना दे मोर !
अंधियारी जिनगी में,
हावे बिकट कलेश !!

बहरा के बने साथी,
अंधरा के हरस लाठी !
तोर किरपा ले कोंदा ,
फाग गाये बिशेष !!

बांझ ह महतारी बनगे ,
लंगड़ा ह पहाड़ चढ़गे !
भिख मंगईया ह,
बनगे नरेश !!

दूजराम साहू
निवास -भरदाकला (खैरागढ़)
जिला_ राजनांदगाँव (छ. ग. )

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4 Comments
  1. Bramha Prasad chandrakar says

    Very nice sir ji

  2. अनाम says

    Very nice sir ji

  3. अनाम says

    Very nice

  4. पदमा साहू says

    बहुत सुंदर वंदना