जलते हैं यह दिये

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सच्चाई की जीत लिए ।
खुशियों की जीत लिए ।
जलते हैं यह दिये ,
दीपावली के लिए ।
दुनिया की Darkness, Light  हो ।
हर जगह freshness bright  हो ।
और लाइट हो रोशनी से जिये।
जलते हैं यह दिये…..
प्रकाश बंट कर भी कम नहीं होती
यह जीने का मतलब है ।
प्रसाद बांट कर भी कम नहीं होती
यही जीने का मतलब है ।
हर चीज मिल बांट कर खाएं
जलती दीपक हमको यही बताए
जान ले प्रिये मान ले प्रिये
जलते हैं यह दिये…..
तेरी आंगन कभी सुनी ना हो ।
तेरी उन्नति दिन रात चौगुनी हो ।
लक्ष्मी मां की तुझ पर हो कृपा
रहे ना कभी तुझ पर वह खफा ।
अबकी दिवाली तेरे जख्मों को सीये।
जलते हैं यह दिये …..

-मनीभाई ‘नवरत्न’

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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