KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जरा हमें बता दो जानेमन -मनीभाई नवरत्न

जब-जब होता है प्रथम मिलन.
चित्त विचलित हो जाता सजन .
ऐसे में करें क्या हम जतन
जरा हमें बता दो जानेमन ।

तन में जोर नहीं ,विक्षिप्त मन।
दिल होता है, असंतुलन।
ऐसे में करें क्या हम जतन
जरा हमें बता दो जानेमन ।

जाओ ना दूर, मेरे सरकार ।
बता ही दो कुछ प्रतिकार ।
सुखमय हो जाए जीवन
दुख दारुन व्यथा करो निवार।

मुझे ले जाओ , अपने शरण।
शनैः शनैःहो जाए,ना मरण।
ऐसे में करें क्या हम जतन
जरा हमें बता दो जानेमन ।

छा जाती है दिन में तंद्रा ।
रात को गायब होती निंद्रा ।
अपलक करें चिंतन
लेकर हम विविध मुद्रा ।

किंचित भी नहीं है भेदावरण।
प्रेम पथ पे बढ़ते चरण।
ऐसे में करें क्या हम जतन
जरा हमें बता दो जानेमन ।

🖋मनीभाई नवरत्न

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