KAVITA BAHAR
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जल ही जीवन पर कविता

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जल ही जीवन पर कविता

sagar
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जीवन दायिनी जल,
घट रहा पल पल,
जल अमूल्य सम्पदा,
सलिल बचाइए।
सूखा पड़ा कूप ताल,
गर्मी से सब बेहाल,
कीमती है बूँद बूँद,
व्यर्थ न बहाइए।
वर्षा जल संचयन,
अपनाएं जन जन,
जल स्तर बढ़ाकर,
संकट मिटाइए।
जागरुक हो जाइए,
कर्तव्य से न भागिए,
पश्चाताप से पहले,
विद्वता दिखाइए।
✍ सुकमोती चौहान रुचि
बिछिया,महासमुन्द,छ.ग.
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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