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जीवन है अनमोल पर कविता

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जीवन है अनमोल पर कविता

दुर्लभ मानव देह जन, सुनते कहते बोल।
मानवता हित ‘विज्ञ’ हो, जीवन है अनमोल।।
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धरा जीव मय मात्र ग्रह, पढ़े यही भूगोल।
सीख ‘विज्ञ’ विज्ञान लो, जीवन है अनमोल।।
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मानव में क्षमता बहुत, हिय दृग देखो खोल।
व्यर्थ ‘विज्ञ’ खोएँ नहीं, जीवन है अनमोल।।
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मस्तक ‘विज्ञ’ विचित्र है,नर निजमोल सतोल।
खोल अनोखे ज्ञान पट, जीवन है अनमोल।।
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‘विज्ञ’ सत्य ही बोलिए, वाणी में मधु घोल।
जन हितकारी सोच रख, जीवन है अनमोल।।
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थिर रख ‘विज्ञ’ विचार को,वायुवेग मत डोल।
शोध सत्य निष्कर्ष ले, जीवन है अनमोल।।
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‘विज्ञ’ होड़ मन भाव से, रण के बजते ढोल।
समरस हो उपकार कर, जीवन है अनमोल।।
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कठिन परीक्षा है मनुज,खेल समझ मत पोल।
सजग ‘विज्ञ’ कर्तव्य पथ, जीवन है अनमोल।।
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कर्तव्यी अधिकार ले, करिए कर्म किलोल।
देश हितैषी ‘विज्ञ’ बन, जीवन है अनमोल।।
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दीन हीन दिव्यांग की, कर मत ‘विज्ञ’ ठिठोल।
सबको शुभ सम्मान दो, जीवन है अनमोल।।
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‘विज्ञ’ छंद दोहे गज़ल, शब्दों की रमझोल।
शर्मा बाबू लाल यह, जीवन है अनमोल।।
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✍©
बाबू लाल शर्मा *विज्ञ*
बौहरा – भवन
सिकंदरा, दौसा, राजस्थान
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