Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

क्यूँ झूठा प्यार दिखाते हो

0 171

क्यूँ झूठा प्यार दिखाते हो

HINDI KAVITA || हिंदी कविता
HINDI KAVITA || हिंदी कविता

क्यूँ  झूठा  प्यार  दिखाते  हो ….
दिल  रह  रह  कर  तड़पाते  हो ..

गैरों  से  हंसकर  मिलते  हो
बस  हम  से  ही  इतराते  हो

घायल  करते  हो  जलवों  से …
नज़रों  के  तीर  चलाते  हो …

जब  प्यार  नहीं  इज़हार  नहीं …
फिर  हम  को  क्यूँ  अज़माते  हो ..

आ  जाओ हमारी  बांहों  में …
इतना  भी  क्यूँ  घबराते  हो …

हम  आपके  हैं  कोई  गैर नहीं …
फिर  क्यूँ  हम  से  शर्माते  हो …

CLICK & SUPPORT

जब  फर्क  तुम्हे  पड़ता  ही  नहीं
क्यूँ  आते  हो  फिर  जाते  हो

दुनिया  की  नज़र  में  क्यूँ  हमको ..
अपना  कातिल  बतलाते  हो ..

तिरछी  नज़रों  से  देख  मुझे …
क्यूँ  मन  ही  मन  मुस्काते  हो ..

मुझको  है  भरोसा  बस  तुम  पर …
क्यूँ  झूठी  कसमें  खाते  हो ..

आते  जाते  क्यूँ  मुझ  पर  तुम
भँवरा  बन  के  मन्डराते हो

करके  महसूस  फिज़ाओं  में
खुशबू  कह  मुझे  बुलाते  हो

जब  प्यार  हुआ  है  तुम  को  भी ..
‘चाहत’  से  क्यूँ  कतराते  हो …

नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी

Leave A Reply

Your email address will not be published.