हिन्दी गीत: जीत होके भी मन निराश है- मनीभाई नवरत्न

निकल पड़े हैं सफर में ,
मंजिल की ना तलाश है
जो हमसफ़र हो तुमसा
तो हर मंजिल पास है।।
फिर क्यों नाराज है, ….
क्यों उदास है….
इस पल में जीत होके भी
मन निराश है……

ख्वाहिशों की भूलभुलैया नगरी में
क्यों भटके हम जेठ दुपहरी में।।
सांसों का , क्या भरोसा जिन्दगी में?
ये कभी भी छोड़े दे ,दो घड़ी में।।
फिर क्यों जाऊँ ? तुम्हें छोड़के
जो नहीं यहाँ कोई, तुमसा खास है।।1।।
फिर क्यों नाराज है, ….
क्यों उदास है….
इस पल में जीत होके भी
मन निराश है……

तू जो कहती है आगे बढ़ मेरे लिये
नैनों से तुम कभी, गुम होना ना।
पीछे मुड़कर ,मैं जो कभी तुम्हें देखूँ
नैनों से नीर बहाते, तुम होना ना।
मेरी जिन्दगी अब हो चुकी तेरी
मुझे भी तेरी धड़कन का अहसास है।।2।।
फिर क्यों नाराज है, ….
क्यों उदास है….
इस पल में जीत होके भी
मन निराश है……

(Visited 7 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे