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जल है तो है कल (Jal hai to hai kal)

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धरती सुख गई ,आसमां सूख जाएगा।
जीने के लिए जल, फिर कहां आएगा ?
संकट छा जाए ,इससे पहले बदल
जल है तो है कल
जल है तो है कल
बूंद बूंद जल होता है,  मोती सा कीमती
“ये रक्त है मेरी’, सदा से धरती माँ कहती
हीरा मोती पैसे जीने के लिए नहीं जरूरी
जल के बिना हर दौलत हो जाती  अधुरी
आने वाले कल के लिए , जा तू संभल
जल है तो है कल
जल है तो है कल
“पेड़ लगाओ-जीवन पाओ”  ये ध्येय हमारा हो।
जल बचाने के लिए, हरियाली नदी किनारा हो।
विनाश की शोर सुनो, “विकास विकास” ना चिल्लाओ।
स्वार्थी इतना मत बनो कि कुल्हाड़ी  अपने पैर चलाओ।
जन को जगाने के लिए ,बना लो दल।
जल है तो है कल
जल है तो है कल
मनीभाई नवरत्न
छत्तीसगढ़
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