KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

करिया बादर पर कविता

भुँईया के छाती ह फाटगे। पानी सुखागे हे घाट के।

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करिया बादर पर कविता

करिया करिया बादर,तै हा आना।
घटा बनके चुंदी ल छरियाना।
जम्मों जीव रद्दा तोर देखत हे।
गरमी पियास कुहका झेलत हे।
बिजली के बिंदी लगाना।
आँखी म काजर अँजाना।
करिया करिया बादर,तै हा आना।
घटा बनके चुंदी ल छरियाना।
भुँईया के छाती ह फाटगे।
पानी सुखागे हे घाट के।
झमझम ले मौसम बनाना।
सुग्घर नगाड़ा बजाना।
करिया करिया बादर,तै हा आना।
घटा बनके चुंदी ल छरियाना।
नदिया अउ नरवा सुखागे।
कुआँ अउ नल ह अटागे।
नवा बहुरिया अस लजाना।
चंदा कस मुँह ल देखाना।
करिया करिया बादर,तै हा आना।
घटा बनके चुंदी ल छरियाना।
रुख राई कल्पत हे देख ले।
जीव जंतु तड़फत हे देख ले।
अमृत के धार ल बोहाना।
गंगा मैंया हमला तै जियाना।
करिया करिया बादर,तै हा आना।
घटा बनके चुंदी ल छरियाना।

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