कृषक मेरा भगवान – मनीभाई नवरत्न

कविता 32
कृषक मेरा भगवान
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मैंने अब तक
जब से भगवान के बारे में सुना ।
न उसे देखा,न जाना ,
लेकिन क्यों मुझे लगता है
कि कहीं वो किसान तो नहीं।।
उस ईश्वर के पसीने से
बीज बने पौधे,
पोषित हुये लाखों जीव।
फसल पकने तक
चींटी,चूहे,पतंगों का
वही एकमात्र शिव।।
किसान तो दाता है
इसीलिए वो विधाता है।
पर वो आज अभागा है।
कुछ नीतियों से ,
कुछ रीतियों से
और कुछ अपने प्रवृत्तियों से।।
वह सब सहता है
इस हेतु कुछ ना कहता है।
गांठ बना लिया है मन में
त्यागी होने की।
आंखों में पट्टी बांध लिया है
जिससे लुट रहे हैं उसे
साधु के भेष में अकर्मण्य लोग।।
संसार का सारा सौदा
किसानों पर है निर्भर।
सब लाभ में है
केवल किसान को छोड़कर।
कठिन लगता है उसे
अपने अधिकारों से लड़ना।
आसान लगता है उसे
दो घड़ी मौत से छटपटाना।।
सारा दृश्य देख,जान
मैं नहीं इस बात से अनजान।
इस जग में
पत्थर सा नहीं खुशनसीब
कृषक मेरा भगवान।
रचनाकाल:-२६दिस.१८,२:५०
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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