KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

चोका – लाचार दूब- मनीभाई नवरत्न

0 93
चोका:-
लाचार दूब
★★★★
हर सुबह
आसमान से गिरे
मोती के दाने
चमकीले, सजीले
दूब के पत्ते
समेट ले बूंदों को
अपना जान
बिखेरती मुस्कान
हो जाती हरा
पर सूर्य पहरा
बड़ी दुरुस्त
कौन बचा उससे
टेढ़ी नज़र
छीने ज़मीदार बन
दूब लाचार
दुबला कृशकाय
कृषक भांति
नियति जानकर
गँवा देता है
सपनों की मोतियाँ
सब भूल के
प्रतीक्षा करे फिर
नयी सुबह
लेकर यही आस
कब बुझेगी प्यास?
✍मनीभाई”नवरत्न”
२७मई २०१८

Leave a comment